मंगलवार, 9 नवंबर 2010

cheeti v sher

चीटी को देखो- चीटी को देखो
खुद करती है अपना काम;
अपनी मेहनत   और लगन
से बनती है धनवान.
शेर को देखो
खुद करता है
अपना शिकार;
जो दूजे के सहारे बैठा
वो रहता बिलकुल बेकार
इससे कुछ सीखो.

1 टिप्पणी:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

क्यूट कविता है..... और सुंदर सीख भी दे रही है...... थैंक यू