बुधवार, 2 अक्टूबर 2013
सोमवार, 5 अगस्त 2013
चींटी मैडम ने सोचा मॉडल मैं बन जाऊं !!
चींटी मैडम ने सोचा मॉडल मैं बन जाऊं !!



चींटी मैडम ने सोचा किस्मत आजमाऊँ ,
जीरो मेरी फिगर है मॉडल मैं बन जाऊं !!
हाई हील पहनकर चली थी वो इतराकर ,
मुड़ी हील सैंडिल की धम्म से गिरी धरा पर !!
उसे देखकर हंसी सहेली ,बोली उसे उठाकर ,
काम नहीं ये सीधा-सादा कुछ तो तू समझाकर !!
ऐश्वर्या या लारा दत्ता उनसे टिप्स तू ले ले ,
सुपर मॉडल बन जायेगी थोड़ी कोशिश कर ले !!
तब से चींटी करती रहती उन दोनों को मेल ,
पर जवाब ना आया उनका प्लानिग हो गई फेल !!
मन को वो समझा लेती खुद पर हँसते हँसते ,
ख्वाब वो देखो जिसको पूरा खुद हो तुम कर सकते !!
शिखा कौशिक 'नूतन '
चींटी मैडम ने सोचा किस्मत आजमाऊँ ,
जीरो मेरी फिगर है मॉडल मैं बन जाऊं !!
हाई हील पहनकर चली थी वो इतराकर ,
मुड़ी हील सैंडिल की धम्म से गिरी धरा पर !!
उसे देखकर हंसी सहेली ,बोली उसे उठाकर ,
काम नहीं ये सीधा-सादा कुछ तो तू समझाकर !!
ऐश्वर्या या लारा दत्ता उनसे टिप्स तू ले ले ,
सुपर मॉडल बन जायेगी थोड़ी कोशिश कर ले !!
तब से चींटी करती रहती उन दोनों को मेल ,
पर जवाब ना आया उनका प्लानिग हो गई फेल !!
मन को वो समझा लेती खुद पर हँसते हँसते ,
ख्वाब वो देखो जिसको पूरा खुद हो तुम कर सकते !!
शिखा कौशिक 'नूतन '
सोमवार, 8 जुलाई 2013
डिम्पी बन्दर घर के अन्दर म्यूजिक तेज बजाता था
डिम्पी बन्दर घर के अन्दर
म्यूजिक तेज बजाता था
मम्मी-डैडी के शोर से
सिर में दर्द हो जाता था !
मम्मी डैडी ने समझाया
धीरे जरा बजा लो
बोला डिम्पी मुंह बिगाड़कर
ऐसे नहीं मज़ा हो !
एक दिन डैडी से मिलने
डॉक्टर अंकल थे घर आये
डिम्पी की गन्दी आदत सुन
डॉक्टर अंकल पास बुलाये
बोले बेटा डिम्पी सुनलो
हो जाओगे तुम बहरे
नहीं सुनाई देगा तुमको
देखोगे बस सबके चेहरे !
डिम्पी के तब समझ में आया
माफ़ी मांगी जोड़ के हाथ
म्यूजिक सुनना धीमे स्वर में
बच्चों तुम भी रखना याद !
शिखा कौशिक 'नूतन '
मम्मी डैडी ने समझाया
धीरे जरा बजा लो
बोला डिम्पी मुंह बिगाड़कर
ऐसे नहीं मज़ा हो !
एक दिन डैडी से मिलने
डॉक्टर अंकल थे घर आये
डिम्पी की गन्दी आदत सुन
डॉक्टर अंकल पास बुलाये
बोले बेटा डिम्पी सुनलो
हो जाओगे तुम बहरे
नहीं सुनाई देगा तुमको
देखोगे बस सबके चेहरे !
डिम्पी के तब समझ में आया
माफ़ी मांगी जोड़ के हाथ
म्यूजिक सुनना धीमे स्वर में
बच्चों तुम भी रखना याद !
शिखा कौशिक 'नूतन '
सोमवार, 27 मई 2013
टीटू बन्दर चला बन-ठन कर ससुराल
टीटू बन्दर चला एक दिन बन-ठन कर ससुराल ,
जेठ की गर्मी में लू खाकर हाल हुआ बेहाल !
सासू माँ ने पिलवाई उसको कोकाकोला ,
दम में दम आई तब जाकर टीटू बन्दर बोला !
सासू माँ तुम कितनी अच्छी ठंडा मुझे पिलाया ,
मैं भी गठरी में रखकर कुछ तुम को देने आया !
गठरी खोली सासू माँ ने उसमे था खरबूजा ,
ले बलैय्या टीटू की बोली न तुझ सा दूजा !
मीठा मीठा खरबूजा दोनों ने काट के खाया ,
गर्मी के इस मौसम का मिलकर लुत्फ़ उठाया !
शिखा कौशिक 'नूतन'
गुरुवार, 16 मई 2013
चीनू बन्दर बड़ा शैतान
चुन्नी और चुन्नू का बेटा ,
चीनू बन्दर बड़ा शैतान ,
मोबाइल पर गेम खेलता ,
पढने का न लेता नाम !
हालत उसकी हो गयी पतली ,
सिर पर जब आये एक्जाम ,
मॉम ने उसको गोद बिठाकर ,
याद कराये पाठ तमाम !
डैडी बोले चीनू बेटा ,
आगे से तुम रखना ध्यान ,
खेल के चक्कर में पढाई का ,
करना मत अब नुकसान !
माफ़ी मांगी चीनू ने फिर ,
पकडे अपने दोनों कान ,
माफ़ किया जब मॉम -डैड ने
तब आई मुख पर मुस्कान !
शिखा कौशिक 'नूतन'
शनिवार, 11 मई 2013
मैं हूँ मौसी शेर की बेटा !
पिंकी बिल्ली गई थी दिल्ली लेकर सूटकेस ,
सूटकेस में थे गहने कंगन, रिंग, नेकलेस ,
ऑटो में वो ज्यों ही बैठी साथ चढ़ा एक चोर ,
सूटकेस लेकर वो भागा , मचा जोर का शोर
पिंकी भागी उसके पीछे , मारा पीठ पे पंजा ,
चोर गिरा वही सड़क पर पापी नीच लफंगा ,
पिंकी ने फिर गला दबाकर उसको यूँ धमकाया ,
मैं हूँ मौसी शेर की बेटा ! बोल समझ में आया ,
चोर ने डरकर पकड़ लिए बिल्ली मौसी के पैर ,
ऐसी चपल-चतुर मौसी से रखना न बच्चो बैर !
शिखा कौशिक 'नूतन '
मंगलवार, 23 अप्रैल 2013
'हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है '
'हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है '
नन्हे फरिश्तों
रामनवमी का पर्व आप सभी ने आनंद के साथ मनाया होगा .राम जी जब छोटे से थे तब उनकी माँ भी उन्हें लोरी सुनाकर सुलाती होगी जैसे आपकी माँ आपको सुलाती हैं .तो आज ये लोरी आप सभी के लिए -

हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है ,
मीठी निंदिया के अर्णव में खुद को डुबोता है .
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
मखमल सा कोमल है लल्ला नाम है इसका राम ,
मैं कौशल्या वारी जाऊं सुत मेरा भगवान ,
ऐसा सुत पाकर हर्षित मेरा मन होता है !
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
मुख की शोभा देख राम की चन्द्र भी है शर्माता ,
मारे शर्म के हाय ! घटा में जाकर है छिप जाता ,
फिर चुपके से मुख दर्शन कर धीरज खोता है !
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
स्वप्न अनेकों देख रहा है सुत मेरा निंद्रा में ,
अधरों पर मुस्कान झलकती राम के क्षण क्षण में ,
मधुर स्वप्न के पुष्पों को माला में पिरोता है !
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
शिखा कौशिक 'नूतन'
मौलिक व् अप्रकाशित
नन्हे फरिश्तों
रामनवमी का पर्व आप सभी ने आनंद के साथ मनाया होगा .राम जी जब छोटे से थे तब उनकी माँ भी उन्हें लोरी सुनाकर सुलाती होगी जैसे आपकी माँ आपको सुलाती हैं .तो आज ये लोरी आप सभी के लिए -

हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है ,
मीठी निंदिया के अर्णव में खुद को डुबोता है .
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
मखमल सा कोमल है लल्ला नाम है इसका राम ,
मैं कौशल्या वारी जाऊं सुत मेरा भगवान ,
ऐसा सुत पाकर हर्षित मेरा मन होता है !
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
मुख की शोभा देख राम की चन्द्र भी है शर्माता ,
मारे शर्म के हाय ! घटा में जाकर है छिप जाता ,
फिर चुपके से मुख दर्शन कर धीरज खोता है !
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
स्वप्न अनेकों देख रहा है सुत मेरा निंद्रा में ,
अधरों पर मुस्कान झलकती राम के क्षण क्षण में ,
मधुर स्वप्न के पुष्पों को माला में पिरोता है !
हौले हौले बह समीर मेरा लल्ला सोता है !
शिखा कौशिक 'नूतन'
मौलिक व् अप्रकाशित
सदस्यता लें
संदेश (Atom)