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रविवार, 27 नवंबर 2011

सपना


सपना 

Cute green eyed kid face photo
[google se sabhar ]




छोटी सी है एक बच्ची ;
अक्ल की नहीं है वह कच्ची;
नाम है उसका सपना ;
सब को समझती है वो अपना.
कक्षा में जब भी जाती है ;
सबको खूब हसाती है; 
अच्छी-अच्छी बाते
कर सबका मन बहलाती है.
घर पर आकर माँ क़ा हाथ बटाती   है;
फिर स्कूल क़ा सारा काम निबटाती है;
अच्छे बच्चे बन सकते हो तुम सब कैसे ?
बन जाओ बिलकुल सपना के जैसे.

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

सूरज चाचा रोज सुबह तुम हमें जगाने आते हो .

     
सूरज चाचा रोज सुबह तुम 
 हमें जगाने आते हो ;
किरण बुआ के उजियारे से 
सारा जग चमकाते हो .
काले काले अंधियारे से 
खो जाती हैं सभी दिशाएं ;
मेरे जैसे नन्हे बच्चे 
माँ से लिपट-चिपट सो जाये 
तुम आकर के अंधकार का 
सारा दंभ मिटाते हो .
सूरज चाचा रोज सुबह 
तुम हमें जगाने आते हो !
शीतकाल में धूप सेंककर 
कितना अच्छा लगता है !
खील-बताशे ;गन्ना गुड भी 
साथ साथ में चलता है ,
तुम ही हो जो क्रूर शीत से 
आकर हमें बचाते हो .
सूरज चाचा रोज सुबह 
तुम हमें जगाने आते हो .

                                 शिखा कौशिक 


गुरुवार, 18 अगस्त 2011

''बिटिया रानी ''

''बिटिया  रानी  ''
Beautiful Little Girl Stock Photo
दादा जी कहते हैं मुझको ' राजदुलारी '  ,
दादी  कहती - मेरी पोती ' सबसे प्यारी' ,
पापा ' प्रिंसेस' कहते मुझको गोद उठाकर,
मम्मी कहती ' ब्यूटी क्वीन' गले लगाकर,
कहें 'लाडली' चूम के माथा नाना-नानी ,
मामा-मौसी कहते हैं ' परियों की रानी' ,
सारे घर में चहक-चहक  चिड़िया बन घूमूं  ,
पाकर सबका स्नेह  ख़ुशी से मैं  हूँ  झूमूं  .
                                     शिखा कौशिक 
[सभी फोटो गूगल से साभार ]


बुधवार, 20 जुलाई 2011

पापा हमको ''डॉगी '' ला दो

 पापा हमको ''डॉगी  '' ला दो 
हम डॉगी संग खेलेंगे ;
उसको पुचकारेंगे जी भर 
कभी गोद में ले लेंगे .


पूंछ हिलाएगा जब आकर 
उसको हम सहलायेंगे ;                                                    
मिटटी में गन्दा होगा जब 
उसको हम नहलायेंगे .
पापा हमको ...

बन्दर जब आयेंगे छत पर 
डॉगी से भगवाएंगे   ;
उश ..उश ..कर कूद कूद कर 
उसको जोश दिलाएंगे 
पापा हमको .....

उसको बाँहों में भर लेंगे 
जब स्कूल से आयेंगे ;                                                           
हाथ मिलाना सिखलाएंगे 
योगा भी करवाएंगे .
पापा हमको .....

                    शिखा कौशिक 



गुरुवार, 14 जुलाई 2011

हम बच्चे हैं प्यारे-प्यारे





फूलों जैसे कोमल मन के
तितली जैसे चंचल हैं ,
हम बच्चे हैं प्यारे-प्यारे
सदा ह्रदय से निर्मल हैं .

होंठों पर मुस्कान सजाये
उछल-कूद हम करते हैं ,
अपनी मीठी बोली से
सबका मन हर लेते हैं .

पापा के हम राज दुलारे
माँ की आँख के तारे हैं ,
हमको ही तो सच करने
अब उनके सपने सारे हैं

शिखा कौशिक

शनिवार, 2 जुलाई 2011

नहीं टालते बात बड़ों की

नहीं  टालते बात बड़ों की 


बारिश के दिन शुरू हुए थे 
टर्र टर्र टर्रराता  था ;
टिंकू मेढक उछल-उछल कर 
अपने पर इतराता था .
उसकी मम्मी उसे रोकती 
उनपर वो चिल्लाता था ;
मम्मी की इस रोक-टोक पर 
उसको गुस्सा आता था ,
मम्मी कहती गीली मिटटी 
कहीं फिसल न तुम जाना !
टिंकू कहता बड़ा अकड़कर 
क्या मुझको बुद्धू माना ?
लेकिन एक दिन खेल-खेल में 
टिंकू गिरा फिसलकर था ;
चोट लगी और दर्द हुआ
तब रोया खूब फफक कर था ,
मम्मी ने फिर गोद बिठाकर 
प्यार से सिर को सहलाया ;
नहीं टालते बात बड़ो की 
बड़े लाड़  से समझाया ,
टिंकू ने फिर कान पकड़कर 
मम्मी से ये बात कही 
आज समझ में आया मुझको 
गलत था मैं और आप सही .
                       शिखा कौशिक